
News India Live, Digital Desk: Dehradun: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक अहम खबर सामने आई है, जिसने प्रोटोकॉल और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 7 और 8 जून को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला मसूरी के दौरे पर थे, जहाँ उन्हें एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेना था। नियमानुसार, ऐसे बड़े पद पर बैठे व्यक्ति के आगमन और प्रस्थान पर ज़िले के सर्वोच्च अधिकारी यानी ज़िलाधिकारी (DM) का मौजूद रहना अनिवार्य होता है। हालांकि, देहरादून के ज़िलाधिकारी सविन बंसल ने इस प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला 7 जून को मसूरी पहुंचे थे और 8 जून को उन्होंने वापसी की। इस दौरान, ज़िलाधिकारी सविन बंसल न तो उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट या उनके पहुँचने के स्थान पर मौजूद थे और न ही उनकी वापसी के समय विदाई देने के लिए दिखे। यहां तक कि वे स्पीकर के सम्मान में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी उपस्थित नहीं हुए। उनके स्थान पर ज़िला प्रशासन की ओर से केवल उप-ज़िलाधिकारी (SDM) को भेजा गया, जबकि प्रोटोकॉल के मुताबिक, ज़िलाधिकारी का मौजूद होना अनिवार्य था।
क्यों माना जा रहा है गंभीर चूक?
लोकसभा स्पीकर का पद संवैधानिक रूप से काफी महत्वपूर्ण और सम्माननीय होता है। ऐसे उच्च पदस्थ गणमान्य व्यक्ति के प्रोटोकॉल को सुनिश्चित करना ज़िला प्रशासन की सीधी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में ज़िलाधिकारी का स्वयं अनुपस्थित रहना और अपने से नीचे के अधिकारी को भेजना, प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है। आमतौर पर स्पीकर जैसे VIP ट्रेन या फ्लाइट से सफर करते हैं, लेकिन इस बार उनका आगमन सड़क मार्ग से था। बावजूद इसके, डीएम की अनुपस्थिति ने अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल खड़े किए हैं।
इस घटना ने सरकारी अधिकारियों के वीआईपी प्रोटोकॉल के प्रति कथित ढीले रवैये को उजागर किया है। यह देखना होगा कि इस मामले में आगे कोई प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है या नहीं
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