
News India live, Digital Desk : The dark truth of Bollywood: बॉलीवुड की दुनिया बाहर से जितनी चकाचौंध भरी दिखती है, अंदर से उतनी ही अंधेरी भी हो सकती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार, राजेश खन्ना। एक ऐसा सितारा, जिसकी एक झलक पाने के लिए लड़कियां पागल हो जाती थीं, जिनकी गाड़ी की धूल को लोग माथे से लगाते थे। लेकिन इसी सितारे की जिंदगी में एक ऐसा भी दौर आया, जब सफलता ने मुंह मोड़ लिया और उन्होंने खुद को खत्म कर लेने तक का मन बना लिया था।
वो सफलता, जो किसी ने नहीं देखी थी
राजेश खन्ना सिर्फ एक एक्टर नहीं, एक एहसास थे। 1969 से 1971 के बीच उन्होंने बॉलीवुड को लगातार 17 सुपरहिट फिल्में दीं। यह एक ऐसा रिकॉर्ड है, जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ पाया। हर तरफ सिर्फ ‘काका’ का जादू था। सफलता उनके कदम चूम रही थी और ऐसा लगता था कि उनका दौर कभी खत्म नहीं होगा।
अचानक अर्श से फर्श पर आ गिरे
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 1976 से 1978 के बीच का दौर राजेश खन्ना के लिए एक बुरे सपने जैसा था। उनकी एक-दो नहीं, बल्कि लगातार 7 फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गईं। जिस सुपरस्टार को देखने के लिए सिनेमाघरों के बाहर लाइनें लगती थीं, अब उसकी फिल्में दर्शकों को तरस रही थीं। यह नाकामी राजेश खन्ना बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे।
जब मन में आए खुदकुशी के ख्याल
जो इंसान सफलता के शिखर पर रहा हो, उसके लिए असफलता का एक झटका भी बहुत भारी होता है। राजेश खन्ना का तो पूरा दौर ही खत्म होता दिख रहा था। वह इस गम में पूरी तरह टूट चुके थे। रिपोर्ट्स बताती हैं कि वह अकेलेपन का शिकार हो गए थे और अक्सर अपने घर की छत पर अकेले बैठकर घंटों रोया करते थे। नाकामी और अकेलेपन का दर्द इतना गहरा था कि उनके मन में आत्महत्या जैसे भयानक ख्याल आने लगे थे। वह जिंदगी से पूरी तरह हार मान चुके थे।
हिम्मत बनकर साथ खड़ी रहीं डिंपल
इस सबसे मुश्किल और अंधेरे दौर में अगर कोई उनके साथ उनकी हिम्मत बनकर खड़ा रहा, तो वह थीं उनकी पत्नी डिंपल कपाड़िया। डिंपल ने उन्हें संभाला, उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें इस दर्द से बाहर निकालने की हर संभव कोशिश की।
आखिरकार, उनकी हिम्मत और दुआएं रंग लाईं। 1979 में आई फिल्म ‘अमरदीप’ ने उनकी किस्मत बदल दी। यह फिल्म सुपरहिट रही और राजेश खन्ना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सुपरस्टार का सूरज भले ही कुछ देर के लिए छिप जाए, पर डूबता नहीं है। इस फिल्म ने उन्हें एक नई जिंदगी दी और वह दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो गए। यह कहानी सिखाती है कि शोहरत की दुनिया का हर सितारा अंदर से एक इंसान ही होता है, जो टूटता भी है और बिखरता भी है।
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