घर में मां की लाश और अकेली 2 साल की बच्ची… फिल्म ‘पीहू’ की वो कहानी जो रूह कंपा देगी

घर में मां की लाश और अकेली 2 साल की बच्ची... फिल्म
0
0
घर में मां की लाश और अकेली 2 साल की बच्ची... फिल्म 'पीहू' की वो कहानी जो रूह कंपा देगी
घर में मां की लाश और अकेली 2 साल की बच्ची… फिल्म ‘पीहू’ की वो कहानी जो रूह कंपा देगी

सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं करता, बल्कि कई बार ऐसी कहानियां भी दिखाता है जो हमारी रूह को अंदर तक झकझोर कर रख देती हैं। ऐसी ही एक कहानी है 2018 में आई फिल्म ‘पीहू’ की, जो एक सच्ची और बेहद दर्दनाक घटना पर आधारित है। यह कहानी एक 2 साल की मासूम बच्ची की है, जो अपनी मां की लाश के साथ एक फ्लैट में दो दिनों तक अकेली बंद रहती है।

फिल्म की शुरुआत एक आम सुबह से होती है। 2 साल की पीहू उठती है और अपनी मां को उठाने की कोशिश करती है, लेकिन वो नहीं उठती। पीहू को लगता है कि उसकी माँ गहरी नींद में सो रही है। वो इस बात से पूरी तरह अनजान है कि उसकी माँ अब इस दुनिया में नहीं रही।

यहीं से शुरू होता है एक मासूम बच्ची का ज़िंदा रहने का वो संघर्ष, जिसे देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। भूख लगने पर वो किचन में खाना ढूंढती है। फ्रिज खोलने की कोशिश करती है, माइक्रोवेव चलाने लगती है, और गीज़र चालू छोड़ देती है। घर के हर कोने में खतरा उसका इंतज़ार कर रहा होता है – कभी बिजली का खुला तार, तो कभी बालकनी का खुला दरवाज़ा।

वह बार-बार अपनी सोती हुई माँ के पास जाती है, उसे अपनी तोतली आवाज़ में जगाने की कोशिश करती है। वह पूरी दुनिया से कटी हुई है, घर के अंदर बिलकुल अकेली। वह न तो मौत को समझती है, न ही उस खतरे को जो उसके चारों तरफ मंडरा रहा है।

निर्देशक विनोद कापड़ी ने इस फिल्म को इतनी सच्चाई से फिल्माया है कि दर्शक हर पल उस बच्ची की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करने लगते हैं। यह फिल्म हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि बच्चे कितने मासूम और असुरक्षित होते हैं। यह कहानी सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक दर्दनाक हकीकत का आईना है, जिसे देखने के बाद आप इसे शायद ही कभी भुला पाएं।

>